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*🥀 14 फरवरी वेलेंटाइन डे का पस मंज़र और इस दिन को मनाने का अंदाज़ 🥀*
🔛 अब सुवाल चूंकि वेलेंटाइन डे के बारे में है कि इस लिए खुसुसन सबसे पहले वेलेंटाइन डे का तारीखी पस मंज़र और इस दिन होने वाली खुराफात को बयान किया जाता है ताकि मुसलमानों पर वाज़ेह हो कि इस गुनाहों से भरपूर दिन की हक़ीक़त क्या है
चुनांचे कहा जाता है कि एक पादरी जिसका नाम वेलेंटाइन था तीसरी सदी ईसवी में रूमी बादशाह कलाडेस सानी के ज़ेरे हुकूमत रहता था किसी नाफ़रमानी की बिना पर बादशाह ने पादरी को जेल में डाल दिया पादरी और जेलर की लड़की के माबैन इश्क हो गया हत्ता की लड़की ने इस इश्क में अपना मज़हब छोर कर पादरी का मज़हब नसरानिय्यत क़बूल कर लिया अब लड़की रोजाना एक सुर्ख गुलाब ले कर पादरी से मिलने आती थी।
बादशाह को जब इन बातों का इल्म हुवा तो उसने पादरी को फांसी देने का हुक्म सादिर कर दिया जब पादरी को इस बात का इल्म हुवा कि बादशाह ने इसकी फांसी का हुक्म दिया है उसने अपने आखिरी लम्हात अपनी मा`शुका के साथ गुजारने का इरादा किया और इस के लिए एक कार्ड उसने अपनी मा`शूका के नाम भेजा जिस पर ये तहरीर था "मुखलिस वेलेंटाइन की तरफ से" बिल आखिर 14 फरवरी उस पादरी को फांसी दे दी गई इसके बा`द हर 14 फरवरी को यह मोहब्बत का दिन उस पादरी के नाम (वेलेंटाइन डे) के तौर पर मनाया जाता है।
जब कि इस तहवार को मनाने का अंदाज़ यह होता है कि नौ जवान लड़को और लड़कियों के बे पर्दगी व बे हयाई के साथ मेल मिलाप तोहफ़े तहाइफ़ के लैन दैन से लेकर फहहाशी व उर्यानी की हर क़िस्म का मुजाहरा खुले आम या चोरी छुपे जिसका जितना बस चलता है आम देखा सुना जाता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में फैमिली प्लानिंग की अदवियात आम दिनों के मुक़ाबले [वेलेंटाइन डे] में कई गुना ज़्यादा बिकती हैं और खरीदने वालो में अक्सरिय्यात नौ जवान लड़के और लड़कियों की होती है गिफ्ट शाप्स और फूलों की दुकान पर रश में इज़ाफ़ा हो जाता है और इन अश्या को खरीदने वाले भी नौ जवान लड़के और लड़कियां होती है।
मशरिकी अकदार के हामिल ममालिक में खुली छूट ना होने की वजह से नौ जवान जोड़ो को महफूज़ मक़ाम की तलाश होती है इस मक़सद के लिए इस दिन होटल की बुकिंग आम दिनों के मुक़ाबले में बढ़ जाती है और बुकिंग कराने वाले और रंग रलिया मनाने वाले नौ जवान लड़के लड़कियां होती है शराब का बे तहाशा कारोबार होता है साहिले समुंदर पर बेपर्दगी और बेहाई का एक नया समुंदर दिखाई देता है।
मगरिबी ममालिक में जहां गैर मुस्लिम मादर पिदर आज़ादी के साथ रहते हैं और फहाशी व उर्यानी और जिंसी बे राह रवी को वहां हर तरह की क़ानूनी छूट हासिल है इस दिन धमा चौकड़ी से बा`ज अवक़ात वोह भी परेशान हो जाते हैं और इसके खिलाफ बा`ज अवाक़ात कहीं कहीं से दबी दबी सदाए ए हतिजाज बुलंद होती रहती है जैसा कि इंग्लैंड में इसकी मुखालफत में ऐहतिजाज किया गया और ऐहतिजाज की बुन्यादी वजह यह बताई गई की इस दिन कि बदौलत इंग्लैंड के एक प्रायमरी स्कूल में 10 साल 39 बच्चियां हामिला हुई।
गौर कीजिए यह तो प्रायमरी स्कूल की दस सालह बच्चियों के साथ सफकिय्यत की ख़बर है वहां के नौ जवान लड़के लड़कियों के नाजाइज़ तअल्लुक़ात और इसके नतीजे में हमल ठहरने और इस्क़ाते हमल की वाक़ीआत की तादाद फिर कितनी होगी इसका अंदाज़ा बखूबी लगाया जा सकता है इंतिहाई दुख और अफसोस की बात यह है कि इस दिन को काफिरों की तरह बेहयाई के साथ मनाने वाले बहुत से मुसलमान भी है।
अल्लाह عزوجل और उसके रसुले करीम صلی اللہ تعالٰی علیہ وآلہ وسلم के अता किए हुए पाकीज़ा अहकामात को पसे पुश्त डालते हुए खुल्लम खुल्ला गुनाहों का इर्तेकाब करके न सिर्फ ये की अपने नामए आ`माल के सियाही में इज़ाफ़ा करते है बल्कि मुस्लिम मुआशरे की पाकीज़गी को इन बेहुदगियो से नापाक व आलुदा करते हैं।
बद निगाही,बेपर्दगी फहहाशी उर्यानि अज्नबी लड़के लकियों का मेल मिलाप हसी मजाक, इस नाजाइज़ तआल्लुक़ को मज़बूत रखने के लिए ताहाईफ का तबादला और आगे ज़िना और दवाइए ज़िना तक की नौबते, ये सब वह बाते है इस रोज़े इस्यां ज़ोरो शोर से जारी रहती है और इन सब शैत़ानी कामो के नाजाइज़ व हराम होने में मुसलमान को जर्रा भर भी शुबा नहीं हो सकता कुरआने करीम की आयाते बय्यीनात और नबिए करीम صلی اللہُ تَعَالٰی علیہِ وآلہ وسلّم के वाजेह इर्शाद से इन उमुर की हुर्मत व मज़म्मत साबित है।
मगर चूंकि इस क़िस्म की सुवाल से मक़सूद यह होता है कि मुसलमानों को दिनी नुक़्तए नज़र से समझाया जाए और इस दिन की खुराफात के साथ इस को मनाने की शनाअ़त व बुराई से इन्हें आगाह करके इनके दिलो में खौफे खुदा और शर्मे मुस्त़फा صلی اللہُ تَعَالٰی علیہ و الہ وسلم पैदा की जाए ताकि वोह इन नापाक कामों से ताईब हो कर अपने अफकार व किरदार की इस्लाह में मशगूल होकर बरोज़े क़ियामत सुर्खरूहों, लिहाज़ा तर्गीब व तहरीब के लिए चंद बाते दिल से मोहब्बत करने वाले अपने इस्लामी भाइयों की खिदमत में अर्ज़ करता हूं खुद भी पढ़े और इस अहम फतवे को जो मजमुन की शक्ल में है आम करे ताकि आम्मतुल मुस्लिमीन के दीनों दुनिया का भला हो।
अब ज़रा अपनी पाकीज़ा शरीअ़त अहकामात मुलाहजा कीजिये किस तरह बदनिगाही बेहयाई बे पर्दगी और हर क़िस्म की फह्हाशी व उर्यानी की मज़म्मत क़ुरआने करीम की आयात और नबी ए करीम صلی اللّٰہ تعالیٰ علیہ واٰلہٖ وسلّم के इर्शाद में बयान हुई है तवज्जोह के साथ पढ़ना सुनना और समझना चूंकि मुसलमानों को कायदा देता है इस लिए इतनी हिम्मत ज़रूर कीजिए और आयात व आहादिस को अपने दिल में दाखिल होने का मौक़ा दिजिए अल्लाहتعالیٰ ने चाहा तो तौबा कि तौफीक़ के साथ साथ परेजगारी की दौलत इत्तीबाए सुन्नत की तौफीक़ भी मिल जाएगी ان شاء اللہ عزوجل
अल्लाह तआला ने कुरआन में इरशाद फ़रमाया मुसलमान मर्दों को हुक्म दो अपनी निगाहें कुछ नीचे रखें और अपनी शर्मगाहों की हिफ़ाज़त करें यह उनके लिये बहुत सुथरा है बेशक अल्लाह को उनके कामों की ख़बर है और मुसलमान औ़रतों को हुक्म दो अपनी निगाहें कुछ नीचे रखें और अपनी पारसाई की हिफ़ाज़त करें और ज़मीन पर पांव ज़ोर से न रखें कि जाना जाए उनका छुपा हुआ सिंगार
*📚 क़ुरआन मजीद पारा 18 सूरह 24 नूर आयत 30, 31*
और फरमाया ऐ नबी अपनी बीबियों और साहबज़ादियों और मुसलमानों की औ़रतों से फ़रमा दो कि अपनी चादरों का एक हिस्सा अपने मुंह पर डाले रहें यह उससे नज़्दीक तर है कि उनकी पहचान हो तो सताई न जायें और अल्लाह बख़्शने वाला मेहरबान है और न किसी मुसलमान मर्द न मुसलमान औरत को पहुंचता है कि जब अल्लाह व रसूल कुछ हुक्म फ़रमा दें तो उन्हें अपने मुआमले का कुछ इख़्तियार रहे और जो हुक्म न माने अल्लाह और उसके रसूल का वह बेशक सरीह गुमराही।
*📚 क़ुरआन मजीद पारा 22 सूरह 33 अहज़ाब आयत 59, 36*
*दोस्तो इस पर हम खुद अमल करें और दूसरो को भी हिदायत दे,*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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